हरियाणा की सड़कों पर आज़ सियासत के दो रंग - एक तरफ एकता की दौड़, दूसरी तरफ रोहतक में शक्ति प्रदर्शन

हरियाणा में त्योहारों के बाद अब सियासत का मौसम लौट आया है। पिछले दो दिनों से प्रदेश की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखी जा रही है। सरकार और विपक्ष दोनों ही सड़कों पर उतर आए हैं। एक तरफ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी प्रदेश में एकता का संदेश दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ रोहतक में बीजेपी और आम आदमी पार्टी आमने-सामने होने जा रही हैं।
पंचकूला से दिया एकता का संदेश
कल 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती थी। इस मौके पर पूरे देश में रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया गया। हरियाणा में इसकी शुरुआत पंचकूला से हुई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद ताऊ देवीलाल स्टेडियम में हरी झंडी दिखाकर दौड़ को रवाना किया।
मुख्यमंत्री ने कल अपने संबोधन में कहा, "सरदार पटेल ने 560 से ज्यादा रियासतों को जोड़कर भारत को अखंड बनाया। आज जब हम दौड़ते हैं, तो हम सिर्फ अपने शरीर के लिए नहीं, बल्कि देश की एकता के लिए दौड़ते हैं।" इस दौड़ में स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। बीजेपी ने इस कार्यक्रम को हर जिले में बड़े स्तर पर आयोजित किया, ताकि संगठन की पकड़ गांव-गांव तक मजबूत हो सके।
रोहतक में आज दोहरी परीक्षा
लेकिन असली सियासी तस्वीर आज 1 नवंबर को रोहतक में दिखेगी। रोहतक को हरियाणा की राजनीतिक राजधानी कहा जाता है और आज वहीं पर दो बड़ी पदयात्राएं निकलने जा रही हैं।
पहली पदयात्रा बीजेपी की है। बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन कल रोहतक से 'लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा' शुरू करेंगे। यह पदयात्रा सिर्फ हरियाणा नहीं, बल्कि पूरे देश में चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप लगाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं। बीजेपी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को सच्चाई बताएंगे।
दूसरी पदयात्रा आम आदमी पार्टी की भी रोहतक में ही मार्च निकालने की है, लेकिन उसका मुद्दा नशा है। आप के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हरियाणा में नशा एक बड़ी समस्या बनता जा रहा है। युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं। सरकार इस पर गंभीर नहीं है। इसलिए आप कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर सरकार को जगाने का काम करेंगे। एक ही शहर में एक ही दिन दो बड़ी पार्टियों के कार्यक्रम से पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।
गन्ना किसानों की नाराजगी भी बड़ी वजह
इन सबके बीच गन्ना किसानों का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। यमुनानगर, करनाल और कुरुक्षेत्र के किसान पिछले कई दिनों से धरने पर हैं। उनकी मांग है कि गन्ने का भाव 430 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए। सरकार अभी 400 रुपये देने की बात कर रही है, लेकिन किसान इससे सहमत नहीं हैं। मिलों में जल्द ही पेराई शुरू होने वाली है। अगर समय पर भाव तय नहीं हुआ तो किसानों ने मिलों को गन्ना न देने की चेतावनी दी है। यह सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।
कुल मिलाकर हरियाणा में अब चुनावी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। आने वाले नगर निगम चुनावों से पहले सभी दल अपनी ताकत दिखाने में लगे हैं।









Join the discussion
Comments (0)