पंजाब चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस एक्शन में, खड़गे-राहुल ने दिल्ली में बनाई रणनीति, 4 नवंबर को संगरूर में बड़ी रैली से AAP को देंगे चुनौती

पंजाब की सियासत में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। एक तरफ आम आदमी पार्टी ने 40 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करके सबको चौंका दिया है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी दिल्ली में बड़ी बैठक करके अपने चुनावी अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली है। शुक्रवार देर रात कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में हुई इस मैराथन बैठक में पंजाब के भविष्य की रणनीति पर घंटों मंथन हुआ।
दिल्ली में हुई हाई-लेवल मीटिंग में कौन-कौन रहा मौजूद?
यह बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी की अगुवाई में हुई। इसमें संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, पंजाब प्रभारी सचिन पायलट के साथ पंजाब कांग्रेस के सभी बड़े चेहरे मौजूद थे। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग , विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा ने अपने-अपने फीडबैक दिए।
सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि जमीन से जुड़ी रिपोर्टों पर खुलकर चर्चा हुई। राहुल गांधी ने हर नेता से एक-एक कर उनके इलाके का हाल पूछा और कहा कि जनता के बीच क्या माहौल है, यह सबसे जरूरी है।
संगरूर रैली से होगा मिशन 2027 का आगाज़
बैठक का सबसे बड़ा फैसला 4 नवंबर को संगरूर में होने वाली महारैली को लेकर है। संगरूर को इसलिए चुना गया क्योंकि यह मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला है और आम आदमी पार्टी का सबसे मजबूत किला माना जाता है। कांग्रेस की सोच है कि अगर सरकार को चुनौती देनी है तो उसके गढ़ में जाकर देनी होगी।
इस रैली में कांग्रेस तीन मुख्य मुद्दों पर AAP सरकार को घेरने की तैयारी में है। पहला मुद्दा है नशे का कारोबार। हाल ही में मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पूरे पंजाब में आक्रोश है। दूसरा मुद्दा पराली का है, जहां सरकार ने किसानों पर 246 FIR दर्ज कर दी हैं। तीसरा मुद्दा कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी का है। कांग्रेस का कहना है कि युवा नौकरी मांग रहा है और सरकार आंकड़ों में उलझी है।
गुटबाजी खत्म, अब एकजुट होकर लड़ना होगा चुनाव
बैठक में खड़गे और राहुल गांधी ने सबसे सख्त संदेश गुटबाजी को लेकर दिया। उन्होंने साफ कहा कि 2022 में कांग्रेस गुटबाजी और अंदरूनी कलह की वजह से हारी थी, इस बार ऐसा नहीं होना चाहिए। टिकट उसी को मिलेगा जो जमीन पर सक्रिय है और जिसका नाम सर्वे में आ रहा है, चाहे वो किसी भी गुट का हो।
राहुल गांधी ने कहा कि पंजाब में पार्टी को सामूहिक नेतृत्व के साथ आगे बढ़ना होगा। किसी एक चेहरे पर चुनाव नहीं लड़ा जाएगा। सभी बड़े नेताओं को एक मंच पर आकर जनता के बीच जाना होगा।
आगे क्या? AAP बनाम कांग्रेस की सीधी टक्कर
आपको बता दें कि पंजाब में 117 विधानसभा सीटें हैं और मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 16 मार्च 2027 को खत्म हो रहा है। चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में होने की उम्मीद है। AAP ने पहली लिस्ट में धूरी से सीएम मान को और कोटकपूरा से स्पीकर कुलतार संधवां को मैदान में उतारा है।
अब कांग्रेस की 4 नवंबर की संगरूर रैली के बाद तस्वीर और साफ हो जाएगी कि 2027 की लड़ाई कितनी दिलचस्प होने वाली है। एक बात तो तय है कि पंजाब में इस बार चुनाव सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि नशा, किसान और युवा - इन तीन मुद्दों पर जनमत का भी होगा।









Join the discussion
Comments (0)