जम्मू-कश्मीर से हिमाचल तक SIR पर बवाल, पहाड़ी राज्यों में वोटर लिस्ट से क्यों डरे हैं लोग

जम्मू-कश्मीर से शुरू हुआ वोटर लिस्ट का विवाद अब हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड तक पहुंच गया है। यहां बात सिर्फ वोट की नहीं, बल्कि पहाड़ में रहने वाले लोगों की पहचान की बन गई है।
पिछले शुक्रवार को जम्मू के प्रेस क्लब के बाहर कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने हाथ में तख्तियां ली हुई थीं - "डोगरा वोट की रक्षा करो"। प्रदेश अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद 2.5 लाख से ज्यादा नए वोटर जोड़े गए हैं। कांग्रेस को डर है कि इससे स्थानीय लोगों की ताकत कम हो जाएगी।
पहाड़ी राज्यों का एक जैसा दर्द :
मैंने हिमाचल के शिमला और उत्तराखंड के अल्मोड़ा में लोगों से फोन पर बात की। एक ही बात सामने आई। हमारे लोग बाहर रहते हैं।
हिमाचल में आंकड़ा देखो - करीब 12 लाख हिमाचली चंडीगढ़, पंजाब और दिल्ली में काम करते हैं। उत्तराखंड में तो 35% परिवारों में पलायन है। गांव में ताला लगा है। जब BLO (बूथ लेवल अधिकारी) घर जाएगा और परिवार नहीं मिलेगा तो सिस्टम में 'Shifted' मार्क कर देगा। बस, नाम लिस्ट से गायब।
इसीलिए हिमाचल के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने लिखा - पहाड़ के लिए अलग नियम बनाओ। जो व्यक्ति 6 महीने के लिए बाहर है, उसका नाम मत काटो।
उत्तराखंड में हरीश रावत ने तो और बड़ा आरोप लगा दिया। उन्होंने कहा कि देहरादून के आसपास की कॉलोनियों में फर्जी नाम जोड़े जा रहे हैं।
भाजपा और चुनाव आयोग क्या कह रहे हैं?
भाजपा के जम्मू कश्मीर अध्यक्ष रविंदर रैना ने हमारे सवाल पर कहा - "कांग्रेस को 2024 की हार पची नहीं है। SIR हर 5 साल में होता है। 370 हटने के बाद पहली बार साफ-सुथरी लिस्ट बन रही है। पहले कई लोग ऐसे वोट डालते थे जिनका जम्मू से कोई लेना-देना नहीं था।"
चुनाव आयोग ने भी 2 नवंबर को बयान जारी किया। आयोग ने साफ कहा - "हमारा मकसद 1 भी असली वोटर को हटाना नहीं है। सिर्फ 3 तरह के नाम हटेंगे - मरे हुए, डबल नाम वाले, और जो हमेशा के लिए शिफ्ट हो गए। अगर गलती से नाम कट भी गया तो फॉर्म 6 भरकर 7 दिन में वापस जुड़ जाएगा।"
आगे क्या होगा?
सूत्र बता रहे हैं कि जम्मू-कश्मीर में पंचायत चुनाव मार्च 2027 में होने हैं। उससे पहले वोटर लिस्ट फाइनल होना जरूरी है। अगर विवाद बढ़ा तो चुनाव टल भी सकते हैं।
हिमाचल में 2027 में विधानसभा चुनाव हैं। वहां तो कांग्रेस की ही सरकार है। अगर उनकी सरकार में ही वोट कटे तो भाजपा को बड़ा मुद्दा मिल जाएगा।
आपके लिए जरूरी जानकारी
अगर आप पहाड़ी राज्य से हैं और बाहर रहते हैं तो अपने परिवार को बोलो कि BLO आए तो एक फॉर्म भरकर दे दें - कि हम यहीं के हैं, बस काम से बाहर हैं। इससे नाम नहीं कटेगा।
कुछ सवाल - जवाब
सवाल SIR क्या है?
जवाब Special Intensive Revision। वोटर लिस्ट को साफ करने की प्रक्रिया।
सवाल पहाड़ी राज्यों में विरोध क्यों ज्यादा है?
जवाब पलायन के कारण। लोग बाहर रहते हैं तो नाम कटने का डर है।
सवाल क्या इससे 2027 चुनाव पर असर पड़ेगा?*
जवाब बिल्कुल। वोटर लिस्ट ही चुनाव की नींव है।








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